स्टार्ट अप की परिभाषा में परिवर्तन

केंद्र सरकार ने 16 जनवरी 2016 को नवाचारो और स्टार्टअप को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए उचित वातावरण के निर्माण हेतु स्टार्ट अप इंडिया की शुरूआत की थी। इसका उद्देश्य देश में आर्थिक वृद्धि को गति प्रदान करना और बड़े स्तर पर रोजगार के अवसरो में वृद्धि करना था।

देश में उद्ममशीलता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने स्टार्टअप की परिभाषा में परिवर्तन किया है। स्टार्टअप की परिभाषा में निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं।

भारतीय आईटी सेक्टर का संकट अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों के लिए भी बड़ी चेतावनी

#Editorial Indian Express

IT Sector in Crisis

मेक इन इंडिया कार्यक्रम ठीक उसी क्षेत्र में लड़खड़ाता हुआ दिख रहा है जिसके बारे में यह अनुमान लगाया जाता था कि वह भविष्य की चुनौतियों का सामना सबसे बेहतर तरीके से कर सकता है. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र (आईटी सेक्टर) के विकास की इमारत मुख्य रूप से निजी कंपनियों की बुनियाद पर खड़ी है. लेकिन इस वक्त इन कंपनियों के हजारों कर्मचारियों पर छंटनी का खतरा मंडरा रहा है.

Report on IT Jobs:

रेलवे की 'रोल आन-रोल आफ' परियोजना

रेल मंत्री सरेश प्रभु ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए ‘रोल आॅन, रोल आॅफ’ (रो-रो) परियोजना का शुभारंभ किया था. इसका लक्ष्य दिल्ली होकर दूसरे राज्यों में जाने वाले हजारों ट्रकों को दिल्ली आने से रोकना था ताकि सड़कों पर जाम और प्रदूषण में कमी की जा सके. लेकिन कई समस्याओं के चलते यह महत्वाकांक्षी परियोजना जल्द ही ढेर हो गई.

What was the scheme:

Ø  इसके तहत व्यवस्था की गई थी कि पंजाब और हरियाणा से सोनीपत के रास्ते दिल्ली होते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा जैसे राज्यों में जाने वाले ट्रकों को दिल्ली से बाहर ही रोक दिया जाए.

थोक मूल्य और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का आधार वर्ष 2011-12 होगा

सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक (डब्लूपीआई) का आधार वर्ष बदलकर 2011-12 कर दिया. इसके अलावा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का आधार वर्ष भी 2011-12 कर दिया गया है. इनके लिए पहले साल 2004-05 आधार वर्ष हुआ करता था.

Ø  नए आधार वर्ष में 2011-12 की देश की अर्थव्यवस्था के अनुरूप बदलाव किए गए हैं. अब डब्ल्यूपीआई की सूची (बास्केट) में 676 की जगह 697 वस्तुएं शामिल की गई हैं.

Ø  इसमें 199 नए सामानों को जोड़ते हुए पुराने 146 सामान हटा दिए गए हैं.

राष्ट्रपति ने बैंकों के फंसे हुए कर्ज (एनपीए) की समस्या से निपटने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी

  • राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने  फंसे हुए कर्ज (एनपीए) की समस्या से निपटने के लिए लाए गए अध्यादेश को मंजूरी दे दी है.
  • इस अध्यादेश के जरिए बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट (1949) में संशोधन किया गया है. इसके तहत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को पहले से अधिक अधिकार दिए गए हैं.

इस अध्यादेश के मुताबिक :-

- आरबीआई बैंकों को डिफॉल्टरों के खिलाफ 2016 के ‘इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड’ (किसी को दिवालिया घोषित करने से संबंधित नियम)’ के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दे सकता है.

क्या होता है सीआरएआर (पूंजी पर्याप्ता अनुपात)

पूंजी पर्याप्ता अनुपात / कार 

- यह बैंक की पूंजी को मापने का एक तरीका है। यह वास्तव में बैंक की जोखिम वाली पूंजी का प्रतिशत बताता है।

- इस अनुपात का इस्तेमाल जमाकर्ताओं के धन की सुरक्षा और वित्तीय तंत्र के स्थायित्व के लिये किया जाता है।

- डिपॉजिट को नुकसान पहुंचाए बगैर लोन बुक पर बैंक कितना घाटा उठा सकता है, पूंजी पर्याप्ता अनुपात से इसका पता चलता है।

अगर यह अनुपात ज्यादा है तो इससे जमाकर्ताओं का जोखिम कम होता है। 

- यह बैंक की जोखिम भारित क्रेडिट को प्रतिशत के रूप में व्यक्त करता है।