बजट के terms : जानें इन कठिन शब्दों का मतलब, बजट समझना होगा आसान

बजट के terms : हम आपको बजट में आने वाले इन कठिन शब्दों के बारे में बताएंगे जिसके बाद आपके लिए बजट को समझना और आसान होगा....

क्या होता है आम बजट?

आम बजट पूरे देश के लिए होता है, जिसमें सरकार नए वित्त वर्ष का लेखा जोखा पेश करती है। सरकार संसद को बताती है कि आने वाले एक साल में वह किस काम के लिए कितना पैसा खर्च करेगी।

आम बजट 2018-19 का सार

आम बजट 2018-19

- केंद्रीय वित्‍त और कॉरपोरेट मामले मंत्री श्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए कहा कि सरकार विनिर्माण सेवाओं और निर्यातों के क्षेत्र में आठ प्रतिशत से अधिक की आर्थिक विकास दर प्राप्‍त करने के प्रति वचनबद्ध है। 2017-18 की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्‍पाद की 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर ने अर्थव्‍यवस्‍था में महत्‍वपूर्ण बदलाव आने के संकेत दिए थे। वित्‍त वर्ष की दूसरी छमाही में सकल घरेलू उत्‍पाद में 7.2 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि होने की आशा है।

बजट 2018 : बजट की महत्वपूर्ण बातें

#बजट2018

 बजट की मुख्य बातें

स्वास्थ्य क्षेत्र : स्वास्थ्य क्षेत्र में दो बड़ी घोषणाएं की है। नेशनल हेल्थ स्कीम के अलावा स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्रों की घोषणा ।

- नेशनल हेल्थ स्कीम के तहत देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों को अस्पतालों में इलाज के लिए 5 लाख रुपए दिए जाएंगे। इससे देश के 50 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे। वहीं यह विश्व का सबसे बड़ा सरकारी वित्त पोषित कार्यक्रम होगा।

- 1200 करोड़ रुपए से स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र विकसित करने की कोशिश की गई है।

 भारत को अभी ‘लेट कंवर्जर स्टाजल’ का सामना नहीं करना पड़ रहा है


एक अध्‍याय में सर्वेक्षण ने यह समीक्षा की है कि भारत के लिए आवश्‍यक ‘लेट कंवर्जर स्टाजल की अवधारणाएं किस हद तक सही हैं और क्या् इस स्टासल से आने वाले वर्षों में भारत के विकास पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।

जीएसटी युग के पहले आठ महीने में अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि


    महालेखा नियंत्रक (सीजीए) से उपलब्ध नवम्बर, 2017 तक के केंद्रीय सरकार के वित्तीय आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वर्ष 2017-18 के पहले आठ महीनों के दौरान सकल कर संग्रहण पर्याप्तः सही दिशा में है तथा गैर-कर राजस्व में धीमी गति के लिए काफी हद तक विनिवेश प्रतिपूर्ति में बेहतर प्रगति हुई है। केन्द्र की प्रत्यक्ष कर वसूली में वृद्धि पिछले वर्ष के अनुरूप रही है और 13.7 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ इसके लक्ष्य पर खरा उतरने की उम्मीद है जबकि अप्रत्यक्ष करों में अप्रैल-नवम्बर, 2017 के दौरान 18.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के उपाय


मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता रही है। सरकार ने इसके लिए कई कदम उठाए हैं, जो निम्नलिखित हैं:
     जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई करने, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और कम आपूर्ति वाली वस्तुओं की कालाबाजारी निवारण एवं आवश्यक वस्तु अनुरूप अधिनियम, 1980 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जरूरत पड़ने पर समय-समय पर राज्य सरकारों को परामर्शिकाएं जारी की जा रही हैं।

आर्थिक समीक्षा | Economic Survey 2017 - 18 Part 1 & 2 in Hindi / English

आर्थिक समीक्षा 2017-18 जो वित्त मंत्रालय, भारत सरकार का फ्लैगशिप वार्षिक दस्ताकवेज है, विगत 12 महीनें में भारतीय अर्थव्यवस्था में घटनाक्रमों की समीक्षा करता है, प्रमुख विकास कार्यक्रमों के निष्पादन का सार प्रस्तुत करता है और सरकार की नीतिगत पहलों तथा अल्पावधि से मध्यावधि में अर्थव्यवस्था की संभावनाओं पर विधिवत प्रकाश डालता है। इस दस्तावेज को बजट सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है।

यह रिपोर्ट एवं क्षेत्रक अर्थव्योवस्था के सभी पहलुओं को शामिल करते हुए विस्तृसत आंकड़ों के साथ मामलों का सिंहावलोकन करती है |

2017-18 के दौरान औसत मुद्रास्फीति दर पिछले छह सालों में सबसे कम

    2017-18 के दौरान देश में मुद्रास्फीति की दर मध्यम रही। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर 3.3 फीसदी रही, जो कि पिछले छह वर्षों में सबसे कम है।
     आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक हाउसिंग, ईंधन और लाइट को छोड़कर सभी बड़े कमोडिटी क्षेत्रों में मुद्रास्फीति दर में यह कमी दर्ज की गई। नवबंर 2016 से अक्टूबर 2017 यानी पूरे 12 महीने के दौरान मुख्य मुद्रास्फीति दर 4 फीसदी से नीचे दर्ज की गई। जबकि चालू वित्त वर्ष अप्रैल-दिसंबर के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक औसतन करीब एक फीसदी रहा।

बैंकों के पुनर्पूंजीकरण तथा व्‍यापक सुधार योजना के ब्‍यौरे के संबंध में सरकार की घोषणा


सरकार ने अक्‍टूबर, 2017 में घोषित सरकारी क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के पुनर्पूंजीकरण (recapitalization) के ब्‍यौरे को स्‍पष्‍ट किया है। वर्ष 2017-18 के पूंजी निवेश योजना में पुनर्पूंजीकरण बॉण्‍ड के जरिए 80,000 करोड़ रुपए तथा बजटीय सहायता के रूप में 8,139 करोड रुपए शामिल है। इस योजना से सभी सरकारी बैंकों की विनियामकीय पूंजी आवश्‍यकता पूरी होगी और अर्थव्‍यवस्‍था को अधिकाधिक उधार देने के लिए पूंजी वृद्धि के प्रति पर्याप्‍त धनराशि उपलब्‍ध होगी।