खाप के खिलाफ: SC


#Jansatta
सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर खाप पंचायतों की मनमानी पर सख्ती दिखाई है। दो बालिगों की शादी को लेकर एक खाप के ‘फैसले’ के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने खाप पंचायतों को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे समाज की ठेकेदार न बनें। 
•    प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले पीठ ने स्पष्टकिया कि दो वयस्कों की शादी में कोई भी तीसरा पक्ष किसी तरह की बाधा नहीं बन सकता, न माता-पिता, न समाज और न ही कोई पंचायत। 

देश में बेटियों की इच्छा रखने वाले स्त्री-पुरुषों की संख्या में वृद्धि 


National Sample Survey: 2005-06 में जहां सिर्फ 70 फीसदी महिला-पुरुष ही बेटियां चाहते थे, वहीं वर्तमान में करीब 79 फीसदी लोगों की चाहत है कि उनके परिवार में एक बेटी जरूर हो. इस बात का एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि पिछले एक दशक में बेटी चाहने वाली महिलाओं में जहां पांच फीसदी की ही बढ़ोतरी हुई है. वहीं ऐसे पुरुषों की संख्या अब 13 फीसदी ज्यादा हो गई है. लेकिन कुल मिलाकर अधिकतर वर्गों में बेटी चाहने वाली महिलाओं की संख्या अभी भी पुरुषों से ज्यादा है. यह सर्वे 49 साल तक की महिलाओं और 54 साल तक के पुरुषों के बीच किया गया है.

क्या होती है खाप पंचायत ? what are khap panchayat

खाप पंचायत :-

जब भी गाँव, जाति, गोत्र, परिवार की 'इज़्ज़त' के नाम पर होने वाली हत्याओं की बात होती है तो जाति पंचायत या खाप पंचायत का ज़िक्र बार-बार होता है.

खाप का अर्थ - खाप एक सामाजिक प्रशासन की पद्धति है जो भारत के कई राज्यों में विस्थापित है। इनमें मुख्य रूप से हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में प्राचीन काल से ही प्रचलित है।

देश में दो करोड़ से ज़्यादा बेटियां हैं जिन्हें उनके माता-पिता जन्म नहीं देना चाहते थे : Economic Survey 2017-18


देश में लगभग दो करोड़ 10 लाख बेटियां ऐसी हैं जिन्हें उनके माता-पिता जन्म नहीं देना चाहते थे. यानी उनके माता-पिता को चाहत तो बेटे की थी लेकिन उसकी जगह अनचाही बेटियों का जन्म होता गया. देश में पहली बार अपनी तरह का यह आकलन सामने आया है. वह भी सरकारी स्रोत से.
    वित्त वर्ष 2017-18 के आर्थिक सर्वेक्षण में यह आकलन शामिल किया गया है. और इसके लिए अमेरिका की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर सीमा जयचंद्रन के अध्ययन और शोध पत्रों को आधार बनाया गया है. 

देश की हर चौथी महिला घरेलू हिंसा की शिकार: नैशनल फैमिली हेल्थ सर्व


मंत्रालय द्वारा कराये गये नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वेक्षण 2015-16 के आंकड़ों को हाल ही में जारी किया गया. इस सर्वेक्षण रिपोर्ट में पाया गया कि देश में महिलाओं को अपने न्यूनतम अधिकारों के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है.
नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 में चिंता और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. केंद्र सरकार यह सर्वेक्षण देश में महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं को दिशा देने के लिए आयोजित करती है.
शारीरिक संबंधों से जुड़े तथ्य

वैवाहिक दुष्कर्म : महिला अस्मिता का यक्ष प्रश्न


#Rajasthan_Patrika
पिछले दिनों दिल्ली उच्च न्यायालय ने वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में शामिल करने के सबन्ध में टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘दण्डात्मक प्रावधान’ के दुरुपयोग होने की आशंका पर वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में नहीं लाना आधार नहीं हो सकता। केन्द्र सरकार का मानना है कि इससे विवाह संस्था भी ढह सकती है। क्या यह बेहतर नहीं होगा कि इस पर तटस्थ होकर गहन विमर्श किया जाए।

समावेशी विकास के मामले में भारत, पाकिस्तान और चीन से भी पीछे

    समावेशी विकास सूचकांक में भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में 62वें स्थान पर है. इस मामले में भारत चीन (26वां) और पाकिस्तान (47वां) से भी पीछे है.
    भारत पिछले साल 79 विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में 60वें स्थान पर था, जबकि चीन 15वें और पाकिस्तान 52वें स्थान पर था. वर्ष 2018 के इंडेक्स में 103 अर्थव्यवस्थाओं की प्रगति का आकलन तीन निजी स्तंभों- वृद्धि एवं विकास, समावेशन और अंतर पीढ़ी इक्विटी के आधार पर किया गया है.