लैंगिक समानता की दृष्टि से राजधानी में कितनी जागरूकता:
निर्भया मामले के बाद ऐसा लगा कि देश बदल जाएगा लेकिन जो जहां था वह वहीं है। राजधानी बच्चे व महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं हैं। बस परिचर्चा और चिंता होती है कि इसके लिए भी हम सब जिम्मेदार हैं। क्योंकि जब घटना होती है तब सब जाकरूक हो जाते हैं… Read More
Why in news:
दिव्यांगों से जुड़े विधेयक- नि:शक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक 2014 (राइट्स आफ पर्सन दि डिसएबिलिटी बिल- आरपीडीबी) को संसद ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।दिव्यांग व्यक्ति अधिकार वाला यह विधेयक पुराने दिव्यांग अधिनियम-1995 का स्थान लेगा। इस नए कानून से दिव्यांगों के मौलिक अधिकारों का संरक्षण… Read More
निर्भया मामले के चार साल बाद भी अगर हालात लगभग जस के तस हैं तो इसकी वजह यह है कि उससे सबक नहीं सीखे गए. (द इंडियन एक्सप्रेस का संपादकीय)
निर्भया को गए चार साल हो चुके हैं. उसके साथ जो हिंसा हुई थी उसे समझना तो छोड़िए, उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. तब देश ने वादा किया था कि वह महिलाओं को न्याय… Read More
भारत में आदिवासी कुपोषण की चपेट में हैं। डाउन टू अर्थ पत्रिका के शोध कार्य बताते हैं कि कुपोषण के कारण बैगा, उरांव तथा संथालो में बौनेपन की समस्या बढ़ रही हैं। लगभग साठ फीसदी से आदिवासी अधिक बच्चे कुपोषित पैदा होते हैं।
मध्य प्रदेश के जिलो में आदिवासियों में कुपोषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा हैं।… Read More
भारत में करीब बीस करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हैं।
यह भुखमरी खाद्यान्न की कमी के कारण नहीं बल्कि खाद्यान्न की बर्बादी और भ्रष्टाचार की वजह से भी है। लालफीताशाही की और भ्रष्टाचार की वजह से देश में करोड़ों लोग भुखमरी की गिरफ्त में है।
संस्था के आकलन के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली आबादी के… Read More
Differently abled population in India
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 2.68 करोड़ (2.21 प्रतिशत) दिव्यांगजन हैं, लेकिन कुछ अन्य अनुमानों के अनुसार वास्तविक संख्या इससे ज्यादा हमारी आबादी का 5 प्रतिशत अधिक हो सकती है। Government schemes and Programme for disabled:
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में… Read More
क्यों खबरों में
दिल्ली हाईकोर्ट ने दवा कंपनियों को राहत देते हुए ‘फिक्स्ड डोज कॉम्बीनेशन’ (एफडीसी) दवाओं पर प्रतिबंध लगाने वाली केंद्र की अधिसूचना को खारिज कर दिया है. यह अधिसूचना इसी साल मार्च में जारी की गई थी| केंद्र सरकार ने ऐसी 344 दवाओं पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की थी. दवा कंपनियों… Read More
पानी हजारों सालों से विभिन्न समाजों की अनिवार्य आवश्यकता रहा है। भारत में पिछले दो दशकों में यह बहुत विचित्र रूप में सामने आई है।
देश के विदर्भ क्षेत्र या अन्य इलाकों में जब बड़ी तादाद में किसान आत्महत्या कर लेते हैं तो भारतीय समाज को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह ऐसी बातों को सहजता से लेने लगा… Read More
